सिलाई करने के लिए आवश्यक सामग्री, सिलाई का काम कैसे शुरू करें, Sewing tools and equipment
सिलाई करने के लिए आवश्यक सामग्री
मशीन और उसके कल-पुर्जे की जानकारी प्राप्त कर लेने
के बाद, आइए, अब सिलाई के लिए आवश्यक सामग्री
जुटाएं। इनमें अधिकांश चीजें तो आवश्यक ही हैं; कुछ चीजें
सिलाई के काम को सुन्दर और सुविधाजनक बनाने के लिए
भी जुटानी होती हैं, विशेष रूप से जब नियमित या अधिक
सिलाई करनी हो।
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| Sewing tools and equipment |
इन वस्तुओं को मुख्यतः चार भागों में बांट सकते हैं:-
1. नाप लेने में सहायक सामग्री,
2. ड्राफ्टिग करते समय और पैटर्न बनाते समय काम में ली
जाने वाली सहायक सामग्री,
3. कटाई-सामग्री,
4. सिलाई में सहायक वस्तुएं।
नाप लेने में सहायक सामग्री
इंचटेप या नापने वाला फीता : इस फीते पर एक ओर 60 इंच
और दूसरी ओर 152 सेंटीमीटर के निशान होते हैं और सिरे
पर एक पीतल की पत्ती लगी होती है। पांच फुट लंबा यह
इंचटेप खरीदते समय देखिए कि उस पर इंच और सेंटीमीटर
के निशान दोनों तरफ समान और चिह्नों की छपाई साफ
स्पष्ट है कि नही? इंचटेप का रंग भी दोनों तरफ अलग-अलग
होना चाहिए। प्रत्येक इंच को आठ भागों में बांटा गया होता
है। ये छोटे आठ भाग ही प्वाइंट कहलाते हैं। इनके मध्य ।
इंच के निशान को भी बड़ी रेखा से दिखाया जाता है। टेप के
दसरी तरफ बने सेंटीमीटर के निशानों को जिन दस छोटे भागों
में बांटा है वे मिलीमीटर कहलाते हैं। सही कटाई में इन सब
चिन्हों का महत्त्व है। इसी तरह इंचटेप के सिरे पर लगी पत्ती
के भी दो उद्देश्य हैं : एक तो उससे नाप लेने में सहायता मिलती
है जैसे पैंट, पजामे, नेकर की गिदरी (टांग का भीतरी भाग) का
नाप इस पत्ती के बिना ठीक से लिया ही नहीं जा सकता। दूसरे,
काम के बाद टेप को इसी पत्ती पर लपेटकर आसानी से
संभाला जा सकता है।
नोट : टेलर मास्टर कोट आदि की सही फिटिंग के लिए नाप
लेने के कुछ अन्य यंत्रों का भी प्रयोग करते हैं। पर सामान्य
घरेलू सिलाई में नाप लेने के लिए इंचटेप ही एकमात्र
महत्त्वपूर्ण वस्तु है।
ड्राफ्टिग में सहायक वस्तु
फुटा (फुट रूल): लकड़ी, धातु, प्लास्टिक आदि से बने एक
फुट के इस सीधे फुटे में बारह इंच के निशान होते हैं और इन
इंचों को आगे 16 भागों में बांटा गया होता है। दो भाग
मिलकर एक 'प्वाइंट' बनाते हैं और एक इंच में कुल आठ
'प्वाइंट' होते हैं। यह फुटा खरीदते समय ध्यान से देखिए कि
इस पर बने निशान स्पष्ट हों। इसके सिरे पतले हों, ताकि
लाइनें सीधी साफ आएं। मोटे और खुरदरे अथवा घिसे
किनारों से रेखाएं ठीक नहीं खींची जाएंगी। फुटा लकड़ी का है
तो लकड़ी मजबूत हो और उस पर किया गया रंग पक्का, यह
फुटा नाप लेने के काम तो नहीं आता पर इससे ड्राफ्ट बनाने में
सहायता मिलती है।
गुनिया (सेट-स्क्वेयर): कागज पर छोटे ड्राफ्ट या खाके
खींचने के लिए लकड़ी, धातु और प्लास्टिक के सेट-स्क्वेयर'
मिलते हैं। रेखागणित में काम आने वाले अंग्रेजी अक्षर 'एल'
की शक्ल के गुनिया इस काम के लिए भी प्रयुक्त होते हैं।
कपड़े पर ड्राफ्टिग के लिए या बड़े नाप के 'पैटर्न' बनाते समय
लकड़ी या धातु के बड़े गुनिया काम में लाए जाते हैं। यह
गुनिया भी 'एल' शक्ल का ही होता है। इसके मध्य भाग में
गोलाइयां भी बनी हों तो यह गुनिया ड्राफ्टिग में अधिक
सहायक हो सकता है। इसलिए या तो 'एल' आकृति का सीधा
गुनिया और गोलाइयों में सहायक विशेष गुनिया, दो
अलग-अलग खरीदिए या फिर 'एल शेप' गुनिया ही मध्य में
गोलाई वाला लीजिए, ताकि वह सही रेखाएं खींचने और
गोलाइयां निकालने के, दोनों कामों में सहायक हो सके। इसके
अलावा फुट की तरह का एक 'टेलर्ज कर्व' भी खरीद लेना
लाभकारी रहेगा। यह भी गोलाइयां निकालने में सहायता
करता है। 'फ्रेंच कर्व' नहीं तो चित्र में दिखाए अनुसार सामान्य
'टेलर्ज कर्व' ही। इसकी सहायता से सही ड्राफ्टिग में मदद
मिलेगी।
गुनिया खरीदते समय भी देखिए, इस पर लगे निशान स्पष्ट
हों। निशान इंच और सेंटीमीटर दोनों के हों। किनारे साफ
और चिकने हों। नोके सही हों। गोलाइयों के मोड़ स्टैंडर्ड नाप
के हों और गुनिया अधिक भारी न हो।
ड्राफ्टिग कागजः कागज के बड़े पैटर्न बनाने के लिए खाकी
रंग में उपलब्ध बड़े नाप के कागज बाजार में मिलते हैं।
इनकी बनावट में धारी लंबाई में हो, यह देखकर खरीदना
चाहिए।
पेंसिल और रबड़ः कागज पर ड्राफ्टिग के लिए ही पेंसिल और
रबड़ का प्रयोग हो सकता है। कपड़े पर ड्राफ्टिग के लिए
'टेलर्ज चॉक' इस्तेमाल किया जाता है। पेंसिल मजबूत और नुकीली हो
कटाई व सिलाई में सहायक अन्य विविध सामग्री
प्रेस और प्रेसिंग-टेबल : प्रेस या इस्तरी दो प्रकार की होती है।
कोयलों की और बिजली की। सारा दिन टेलरिंग का काम
करना हो तो कोयलों वाली प्रेस ठीक रहती है। घरेलू काम के
लिए बिजली की प्रेस ही सुविधाजनक रहेगी। कोयले वाली
प्रेस भी धोबी-प्रेस से अलग, विशेष प्रकार की दर्जी प्रेस ही
होनी चाहिए, जिसका वजन तीन से चार किलो हो। यह न
बहुत ज्यादा गर्म रहे, न ठंडी। इसकी बनावट ही इसी प्रकार
की होती है कि कोयला धीरे-धीरे सुलगता रहे और आंच कम
कैचियां : अच्छी कटाई-सिलाई के लिए विभिन्न प्रकार की
कैंचियां काम में लाई जाती हैं:-
साधारण कैंची: इसके दोनों फल सीधे होते हैं। यह हलके
कपड़े काटने, 'टकिंग' करने और फालतू धागे आदि काटने के
लिए उपयोगी है।
'शीयर : इसके दोनों फल सिरे से मुड़े होते हैं। एक सिरे का फेर
इतना बड़ा होता है कि उसमें चारों उंगलियां आसानी से आ
जाएं। यह मोटे और भारी कपड़ों को काटने के काम आती है।
इससे काम करते समय चौड़े फल को मेज पर टिकाकर कटाई
करनी चाहिए। अधिक मात्रा में कटाई के लिए यही कैंची
उपयुक्त है।
पिकिंग शीयर : इसके दोनों फल दांतेदार होते हैं। यह
सिलाइयां चीरने, टक लगाने और किनारे काटने के काम आती
हैं। रेशमी वस्त्रों व गर्म पोशाकों की भीतरी सिलाइयों के
किनारे भी इसी से जिगजैग काटे जाते हैं।
काज वाली कैंची: काज काटने की कैंची के फल मध्य से गोल
और कोने से अधिक नकीले होते हैं। इस कैंची में ऊपर एक
पेंच भी लगा होता है, जिससे छोटे-बड़े काज की लंबाई
बराबर रखी जा सकती है।
छोटी कैंची: छोटी और नकीली कैंची धागे काटने व कढ़ाई में
विशेष रूप से काम आती है।
एप्रिनः कटाई-सिलाई के समय एप्रिन बांधकर काम करने से
अपने वस्त्र खराब नहीं होते। इसलिए यह आदत डालना भी
ठीक होगा।
अंगुश्ताना ः हाथ की सिलाई करते समय, जैसे काज, तुरपन
और भीतरी टांकों के समय सुई हाथ में न लगे, इसके लिए बाएं
हाथ की बीच की उंगली पर पहनने की लोहे की टोपी-सी,
जिसमें चित्र के अनुसार छोटे-छोटे छेद बने होते हैं, को
अंगुश्ताना कहते है। नियमित सिलाई करने वालों को इसका
उपयोग अवश्य करना चाहिए।
सुइयां : सिलाइ के।लए मशीन की सुई और हाथ की सई दोनों
की जरूरत पड़ती है। उनका नम्बर कपड़े के अनुसार ही लेना
चाहिए (मशीन की सुई के नम्बर पहले बताए जा चुके हैं)।
हाथ की सुई में भी तुरपन के लिए, कच्चे टांके डालने के लिए,
काज बनाने व बटन टांकने के लिए कई नम्बरों की सुइया
प्रयोग में लाई जाती हैं। पर आम घरेलू प्रयोग में 6, 7, 8
नम्बर की सई ही अधिक चलती है।
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